ब्यूरो रिपोर्ट -विशाल विचार (रांची)
रांची: झारखंड सरकार ने बैंकिंग धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक को सरकारी कामकाज के लिए ‘ब्लैकलिस्ट’ (सूची से बाहर) कर दिया है। राज्य के वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने इस संबंध में आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रशासन ने सभी विभागों और ट्रेजरी अधिकारियों को आदेश दिया है कि इन दोनों बैंकों में जमा सरकारी राशि को तत्काल निकालकर अन्य सूचीबद्ध (लिस्टेड) बैंकों में स्थानांतरित किया जाए।
500 करोड़ से अधिक की राशि होगी शिफ्ट
राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (PSUs), निगमों, बोर्डों और स्थानीय निकायों की 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि इन दो बैंकों में जमा है। वित्त सचिव ने विभागीय प्रधानों, प्रमंडलीय आयुक्तों, उपायुक्तों (DC) और ट्रेजरी अधिकारियों को पत्र लिखकर इस निर्णय को कड़ाई से लागू करने को कहा है।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
इस कार्रवाई के पीछे मुख्य कारण पिछले साल हुए करोड़ों रुपये के घोटाले हैं:
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: ‘झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लाइज मास्टर ट्रस्ट’ (JSEEMT) के खाते से लगभग 56.50 करोड़ रुपये की अवैध निकासी हुई थी। CID और SIT की जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई, जिसके बाद बैंक के ब्रांच मैनेजर को गिरफ्तार किया गया था।
- केनरा बैंक: झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) के खाते से करीब 53 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया। इस मामले में भी केनरा बैंक के ब्रांच मैनेजर को आरोपी बनाया गया है।
सरकार के अनुसार, इन दोनों संस्थानों (JSEEMT और JTDC) के खातों से कुल 109 करोड़ रुपये की जालसाजी की गई थी, जो राशि अब तक वापस नहीं मिल सकी है।
रांची यूनिवर्सिटी ने शुरू की कार्रवाई
सरकार का आदेश मिलते ही रांची विश्वविद्यालय और उसके अंतर्गत आने वाले कॉलेजों ने सक्रियता दिखाई है। मंगलवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन बैंकों से अपनी जमा राशि निकालकर दूसरे सुरक्षित बैंकों में ट्रांसफर कर दी। अन्य सरकारी कार्यालयों में भी फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर जारी है।
मुख्य बिंदु:
- घोटाले में अब तक कुल 7 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
- धोखाधड़ी की कुल रकम लगभग 109 करोड़ रुपये है।
- सरकार ने इसे ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत उठाया गया कदम बताया है।
इस फैसले से बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मच गया है, वहीं राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि सरकारी धन की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले वित्तीय संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा।

