विधायक निसात आलम ने उठाया मामला, सरकार ने उच्च स्तरीय समिति बनाने की कही बात।

श्रीकांत दास / विशाल विचार

झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में गुरुवार को पाकुड़ विधायक निसात आलम ने एक बार फिर बरहरवा प्रखंड को साहिबगंज से अलग कर पाकुड़ जिला में शामिल करने की मांग को गंभीरता से उठाया। विधायक ने कहा कि बरहरवा के लोगों को बुनियादी सुविधाएँ, प्रशासनिक कार्यों और जिला मुख्यालय तक पहुँचने में भारी परेशानी होती है, ऐसे में प्रखंड को पाकुड़ जिला में शामिल करना जनता के हित में जरूरी है।विधानसभा में बोलते हुए विधायक निसात आलम ने कहा कि वर्तमान में बरहरवा प्रखंड मुख्यालय से साहिबगंज जिला मुख्यालय की दूरी लगभग 72 किलोमीटर है।जबकि बरहरवा की सीमा से पाकुड़ जिला मुख्यालय मात्र 22 किलोमीटर दूर है।उन्होंने कहा कि इतनी लंबी दूरी तय करना ग्रामीणों के लिए कठिन है। अस्पताल, राजस्व कार्य, जिला कार्यालय से जुड़े कामों के लिए लोगों को अतिरिक्त समय और खर्च दोनों उठाने पड़ते हैं। यदि बरहरवा प्रखंड को पाकुड़ जिला में शामिल किया जाता है तो हजारों लोगों को सीधा लाभ होगा।विधानसभा में विधायक की बात पर जवाब देते हुए विभागीय सहयोगी मंत्री दीपक बिरूआ ने कहा “इस संबंध में विधायक उपायुक्त और कमिश्नर के माध्यम से राज्य सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेजवाने में सहयोग करें। रिपोर्ट आने के बाद सरकार इस पर उच्च स्तरीय समिति गठित कर आवश्यक कार्रवाई करेगी।”इस बयान के बाद यह मुद्दा केन्द्रीय चर्चा में आ गया है और सरकार स्तर पर भी इस प्रस्ताव को गंभीरता से लिए जाने का संकेत मिला है।निसात आलम ने बताया कि बरहरवा के लोगों को सबसे बड़ी समस्या जिला मुख्यालय तक पहुंच की है।उन्होंने कहा साहिबगंज की दूरी अधिक होने से ग्रामीणों को पूरे दिन का समय और आर्थिक खर्च लग जाता है।जबकि पाकुड़ नजदीक होने के कारण लोगों को सुविधाएँ आसानी से मिल सकेंगी।अगर 2026 तक इस प्रस्ताव पर कार्रवाई कर बरहरवा प्रखंड को पाकुड़ जिला से जोड़ दिया जाता है तो जनता को बड़ी राहत मिलेगी।निसात आलम ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सोच है कि विकास की हर योजना गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। बरहरवा प्रखंड को पाकुड़ जिला में शामिल करने का निर्णय इसी सोच को मजबूत करेगा।बरहरवा क्षेत्र के लोगों में इस चर्चा के बाद उम्मीद बढ़ गई है कि जल्द ही प्रशासनिक सीमाओं का पुनर्गठन हो सकता है, जिससे प्रखंड के लोगों को जिला मुख्यालय से जुड़ी हर सुविधा आसानी से मिल सके।

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