इलाज के दौरान मरीज की मौत के बाद डेढ़ घंटे तक भटकते रहे परिजन, मोक्ष वाहन के अभाव में मानवता हुई शर्मसार।

श्रीकांत दास / विशाल विचार
राजमहल साहिबगंज राजमहल अनुमंडलीय अस्पताल में शुक्रवार को एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के बाद परिजनों को शव घर ले जाने के लिए करीब डेढ़ घंटे तक भटकना पड़ा। अंततः मजबूरी में परिजनों ने ई-रिक्शा पर शव रखकर अपने घर ले जाने का फैसला किया। यह दृश्य न केवल संवेदनशील लोगों को झकझोर देने वाला था, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाला भी रहा।मृतक की पहचान तीनपहाड़ थाना क्षेत्र के शिवा पहाड़ नीचे टोला निवासी दीपक महतो (32 वर्ष) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार दीपक महतो को इलाज के लिए राजमहल अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत के बाद सबसे बड़ी परेशानी शव को घर ले जाने को लेकर खड़ी हो गई।परिजनों ने बताया कि अस्पताल में मौजूद कर्मियों से बार-बार मोक्ष वाहन या एंबुलेंस की मांग की गई, लेकिन कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस होने के बावजूद उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि वाहन उपलब्ध नहीं है। वहीं ऑटो स्टैंड पर भी कोई वाहन शव ले जाने को तैयार नहीं हुआ।करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करने के बाद मजबूर होकर परिजनों ने एक निजी ई-रिक्शा की व्यवस्था की और उसी पर शव को अपने गांव ले गए। इस दौरान अस्पताल परिसर और बाजार क्षेत्र में मौजूद लोग यह दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए।घटना के बाद मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक अपने पीछे पत्नी, दो बेटे और एक बेटी छोड़ गया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि अनुमंडलीय अस्पताल में केवल दो एंबुलेंस और सीमित डॉक्टरों के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है। जानकारी के अनुसार अस्पताल में उपाधीक्षक समेत कुल सात डॉक्टर कार्यरत हैं, जो लोगों का सवाल है कि जब अस्पताल में इलाज की सुविधा है, तो कम से कम एक स्थायी मोक्ष वाहन की व्यवस्था क्यों नहीं है।इस घटना के बाद राजमहल बाजार और आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर तीखी चर्चा हो रही है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए तत्काल मोक्ष वाहन और पर्याप्त एंबुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।यह घटना न सिर्फ सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाती है, बल्कि आम जनता के दर्द और मजबूरी की सच्ची तस्वीर भी पेश करती है।
