श्रीकांत दास / विशाल विचार

राजमहल साहिबगंज, राजमहल प्रखंड के जमालपुर और दलाही गांव में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (ATMA), साहिबगंज के एस.एम.ए.ई. योजना के तहत संचालित कृषक पाठशालाओं में बटन मशरूम की खेती के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।जिला कृषि पदाधिकारी एवं परियोजना निदेशक प्रमोद एक्का ने बताया कि जमालपुर गांव में “मदर टेरेसा” महिला समूह की अध्यक्ष करमिला एक्का और दलाही गांव के “जय गुरू” महिला समूह की अध्यक्ष विमला देवी के नेतृत्व में प्रत्येक समूह में 25-25 महिलाएं द्वारा बटन मशरूम की खेती कर अपनी आजीविका सशक्त बना रही हैं।उप परियोजना निदेशक मन्टु ने कृषक पाठशाला में पहुँचकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए मशरूम की खेती के वैज्ञानिक तरीकों पर सलाह दी। इस परियोजना के तहत एलआईसी एच.एफ.एल. सी.एस.आर., निर्देश संस्था, और कृषि विभाग के संयुक्त सहयोग से हृदय परियोजना के अंतर्गत दलाही और महासिंगपुर गांवों में पूर्ण आर्थिक सहयोग से स्वेत बटन मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है।महासिंगपुर में अब तक 3 क्विंटल 35 किलो और दलाही में 1 क्विंटल 13 किलो उत्पादन हो चुका है। समूह की महिलाएं प्रतिदिन मशरूम तोड़कर बेच रही हैं और अपने आय के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।इस परियोजना की सफलता में एलआईसी एच.एफ.एल. सी.एस.आर. के रीजनल लीडर सौरव चक्रवर्ती, निर्देश संस्था के सचिव डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह, हृदय परियोजना के कार्यक्रम प्रबंधक राजीव रंजन झा, कार्यक्रम पदाधिकारी नैंसी गुप्ता, विशाल कुमार ठाकुर, तथा परियोजना अंतर्गत कार्यरत सभी सहकर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।कृषि विभाग के प्रक्षेत्र प्रभारी ओम प्रकाश पंडित और समूह की महिलाएं करमिला एक्का, सुनीता टोप्पो, मिथुन बड़ा, पंकज विशाल कुमार ठाकुर, विमला देवी, पूजा देवी, शकुंतला देवी, पुनम कुमारी सहित सभी सदस्य इस मौके पर उपस्थित रहे।राजमहल में इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और तकनीकी सहयोग से कृषि क्षेत्र में आर्थिक सशक्तिकरण संभव है।

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