• बर्न टेस्ट (Burn Test): शॉल के किनारे से एक छोटा धागा निकालकर जलाएं। यदि जलने पर जले हुए बालों जैसी गंध आए और वह बारीक राख (ash) बन जाए, तो वह असली है। नकली (सिंथेटिक) धागा जलने पर प्लास्टिक जैसी गंध देगा और पिघलकर कठोर मोती (hard bead) बन जाएगा।
  • रिंग टेस्ट (Ring Test): एक असली पश्मीना शॉल इतनी महीन होती है कि वह पूरी की पूरी एक छोटी अंगूठी (wedding ring) के बीच से आसानी से निकल सकती है।
  • रबिंग टेस्ट (Rubbing Test): कपड़े को आपस में रगड़ें। यदि रगड़ने पर स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी (चिंगारी या कड़कड़ाहट) महसूस हो, तो वह नकली है। प्राकृतिक पश्मीना में यह नहीं होता। 
  • बुनाई की अनियमितता: असली पश्मीना हमेशा हाथ से बुना जाता है, इसलिए इसकी बुनाई में हल्की अनियमितताएं (uneven weave) दिखेंगी। मशीन से बनी नकली शॉल की बुनाई एकदम सटीक और एकसमान होती है।चमक: असली पश्मीना की चमक मैट (matte) होती है। यदि शॉल बहुत ज्यादा चमक रही है, तो उसमें सिल्क या सिंथेटिक फाइबर मिला हो सकता है। 
  • 3. अन्य पहचान
  • वजन और गर्मी: असली पश्मीना शॉल वजन में बहुत हल्की (लगभग 150-200 ग्राम) होती है, लेकिन ओढ़ते ही तुरंत गर्माहट का अहसास कराती है।
  • GI टैग: सबसे भरोसेमंद पहचान GI (Geographical Indication) टैग है। सरकार द्वारा प्रमाणित असली कश्मीरी पश्मीना पर यह टैग लगा होता है।
  • कीमत: असली पश्मीना बनाने में महीनों का समय लगता है, इसलिए यह कभी सस्ती नहीं होती। इसकी कीमत आमतौर पर ₹10,000 से शुरू होकर लाखों तक जा सकती है। 
  • असली पश्मीना खरीदने के लिए आप भरोसेमंद सरकारी आउटलेट्स या प्रमाणित विक्रेताओं का चुनाव करें। आप Craft Development Institute (Srinagar) जैसे संस्थानों की वेबसाइट पर पश्मीना प्रमाणीकरण के बारे में अधिक जान सकते हैं।

By E INDIA

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