सुमन कुमार दत्ता -विशाल विचार(पाकुड़)

पाकुड़: संताल परगना की समृद्ध संस्कृति और आदिवासियों के सबसे बड़े त्योहारों में से एक ‘सोहराय पर्व’ इस वर्ष भी पाकुड़ के बाजार समिति प्रांगण में धूमधाम से मनाया जाएगा। आगामी 12, 13 और 14 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय महोत्सव को लेकर प्रशासन और आदिवासी समाज ने कमर कस ली है।

भगवान और गौ-वंश के प्रति आभार का पर्व

सोहराय पर्व मुख्य रूप से प्रकृति और पशुधन को समर्पित है। यह पर्व बीते वर्ष अच्छी बारिश, बेहतर कृषि उपज और अनाज के लिए भगवान को धन्यवाद देने के लिए मनाया जाता है। इस उत्सव में खेती-बाड़ी में सहयोग करने वाले गाय, बैल और अन्य मवेशियों की विशेष पूजा-अर्चना और सम्मान किया जाता है।

उत्सव की रूपरेखा: सफाई से लेकर संगीत तक

बैठक में निर्णय लिया गया कि पर्व की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान से होगी:

  • 11 जनवरी: पाकुड़ प्रखंड के एक चयनित गाँव में सांकेतिक रूप से साफ-सफाई अभियान और घरों की दीवारों पर पारंपरिक सोहराय पेंटिंग की जाएगी।
  • 12 जनवरी: विधि-विधान के साथ ‘गोड पूजा’ का आयोजन होगा।
  • 13 जनवरी: पारंपरिक ‘खुटांव’ का आयोजन किया जाएगा।
  • 14 जनवरी: ‘बेजहा’ के साथ-साथ भव्य संगीत कार्यक्रम आयोजित होंगे।

विलुप्त होते वाद्ययंत्रों और स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेगा मंच

इस वर्ष के आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें संताल समाज के विलुप्त हो रहे वाद्ययंत्रों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, क्षेत्र के उभरते हुए स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए विशेष मंच प्रदान किया जाएगा।

खान-पान और वेशभूषा का आकर्षण

मेला परिसर में स्थानीय वेशभूषा और पारंपरिक भोजन के स्टॉल लगाए जाएंगे। आयोजन समिति ने स्थानीय लोगों और समूहों को स्टॉल लगाने के लिए सादर आमंत्रित किया है, ताकि लोग आदिवासी व्यंजनों और संस्कृति का आनंद ले सकें।

बैठक में उपस्थित रहे अधिकारी और बुद्धिजीवी

इस भव्य आयोजन की रूपरेखा तैयार करने के लिए आयोजित बैठक में अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), अंचल अधिकारी (CO) और बाजार समिति के सचिव मौजूद रहे। इनके अलावा आदिवासी समाज के प्रबुद्ध बुद्धिजीवी, स्थानीय मुखिया, गणमान्य नागरिक और के.के.एम. कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। इस बैठक का प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए उपायुक्त (DC), पाकुड़ को समर्पित किया जाएगा।

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