सुमन कुमार दत्ता -विशाल विचार(पाकुड़)
पाकुड़: झारखंड के पाकुड़ जिले ने शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी और अभिनव पहल “परख-पढ़ाई और खेल” को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘स्कॉच अवार्ड 2025’ (SKOCH Award 2025) के लिए चुना गया है।
यह पुरस्कार आगामी 10 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित होने वाले 105वें स्कॉच शिखर सम्मेलन के दौरान जिले को प्रदान किया जाएगा।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और कठिन मूल्यांकन में मिली जीत
स्कॉच ग्रुप द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार बेहद कड़ी और स्वतंत्र मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए जाना जाता है। पाकुड़ जिला प्रशासन ने कई चरणों की स्क्रीनिंग, प्रेजेंटेशन और जमीनी स्तर पर हुए सकारात्मक बदलावों के प्रमाण प्रस्तुत किए, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर इस मॉडल को सर्वश्रेष्ठ माना गया।
पाकुड़ मॉडल: इन 5 नवाचारों ने बदली स्कूलों की सूरत
उपायुक्त मनीष कुमार के विजनरी नेतृत्व में जिले में शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उसे ‘पीपुल-कनेक्ट’ और ‘एक्टिविटी-बेस्ड’ बनाया गया है। इस सफलता के पीछे ये मुख्य स्तंभ रहे:
- फिर से स्कूल चले हम: ड्रॉपआउट (स्कूल छोड़ने वाले) बच्चों को वापस मुख्यधारा से जोड़ना।
- बोलेगा पाकुड़ एवं बात तो करनी होगी: बच्चों के भीतर के संकोच को दूर कर उनके आत्मविश्वास और संवाद शैली को निखारना।
- परख टेस्ट: बच्चों के सीखने के स्तर (Learning Level) की नियमित और वैज्ञानिक जांच।
- तिथि भोजन सह जन्मोत्सव: सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना, जिससे स्कूलों में उपस्थिति और अपनत्व बढ़ा।
- एक पन्ना रोज का: बच्चों में नियमित लेखन और नई चीजें सीखने की आदत डालना।
“टीम पाकुड़ की मेहनत का फल” – उपायुक्त मनीष कुमार
इस गौरवशाली उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उपायुक्त मनीष कुमार ने इसका पूरा श्रेय अपनी पूरी टीम को दिया है। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी, शिक्षा अधीक्षक, शिक्षकों और विभाग के सभी कर्मियों को बधाई दी।
“यह सम्मान पाकुड़ की टीम भावना का प्रतिफल है। हमने ‘परख’ के माध्यम से पढ़ाई और खेल को जोड़कर बच्चों के सर्वांगीण विकास का जो लक्ष्य रखा था, उसे आज राष्ट्रीय पहचान मिली है। यह साबित करता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर सोच नवाचारी हो, तो बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।” – मनीष कुमार, उपायुक्त, पाकुड़
झारखंड के लिए प्रेरणा बना पाकुड़
पाकुड़ जैसे जिले का राष्ट्रीय पटल पर चमकना पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी एक ‘ब्लूप्रिंट’ पेश करती है कि कैसे सरकारी स्कूलों को आधुनिक और परिणामोन्मुखी बनाया जा सकता है।
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