सुमन कुमार दत्ता -विशाल विचार (पाकुड़ )
पाकुड़: संथाल परगना की गौरवशाली वीर गाथा और संघर्षों की याद में सोमवार को पाकुड़ में संथाल परगना स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय सिदो-कान्हो मुर्मू पार्क में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहाँ जनमानस ने अपने महानायकों के बलिदान को नमन किया।
महानायकों को माल्यार्पण और नमन
कार्यक्रम के दौरान संथाल हूल (विद्रोह) के महानायक वीर शहीद सिदो-कान्हो और चांद-भैरव की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। उपस्थित लोगों ने नम आँखों से शहीदों के साहस और उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया।
प्रशासनिक अधिकारियों और युवाओं की भागीदारी
इस गरिमामयी अवसर पर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अमरेंद्र चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित किए। कार्यक्रम में केकेएम कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो नई पीढ़ी के जुड़ाव को दर्शाता है।
ऐतिहासिक महत्व: जल, जंगल और जमीन की रक्षा
संबोधन के दौरान कार्यपालक पदाधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने हूल क्रांति के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा:
- 22 दिसंबर 1855 को संथाल विद्रोह की आधिकारिक शुरुआत हुई थी।
- यह संघर्ष अंग्रेजों के दमनकारी शासन, साहूकारों के शोषण और जमींदारों के अत्याचारों के खिलाफ आदिवासियों का निर्णायक युद्ध था।
- सिदो-कान्हो और चांद-भैरव के नेतृत्व में हजारों वीरों ने अपनी जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
“इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को उनके पूर्वजों के संघर्षों से अवगत कराना है, ताकि समाज में उनके आदर्श सदैव जीवित रहें।” — अमरेंद्र चौधरी, कार्यपालक पदाधिकारी
सामूहिक संकल्प और उपस्थिति
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने वीर शहीदों के बताए मार्ग पर चलने और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि संथाल परगना की मिट्टी वीरों की कहानियों से सिंचित है।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे: माईनेल किस्कू, चांद हांसदा, बाबूलाल मरांडी, मनवेल टुडू, माशेर्ल हेम्ब्रम, बड़का मुर्मू, कालीदास सोरेन, पुनम हेम्ब्रम, च्रपा सोरेन, प्रेमलता हेम्ब्रम समेत भारी संख्या में स्थानीय नागरिक और छात्र।
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