सुमन कुमार दत्ता -विशाल विचार (पाकुड़)
पाकुड़। साल 2025 के विदाई और नए वर्ष के आगमन की बेला में पाकुड़ की फिजाओं में सियासी पारा चढ़ने लगा है। नगर निकाय चुनाव की सुगबुगाहट ने अब सरगर्मी का रूप ले लिया है। हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अब तक चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन शहर की गलियों और चाय की दुकानों पर ‘अगला पार्षद कौन?’ की चर्चाएं आम हो गई हैं।
आरक्षण की ‘मुट्ठी बंद’, रणनीति पर्दे के पीछे
वर्तमान में सबसे बड़ा पेंच आरक्षण की स्थिति को लेकर फंसा हुआ है। जब तक आरक्षण की तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक कई संभावित प्रत्याशी अपनी दावेदारी सार्वजनिक करने से बच रहे हैं। राजनीतिक दल हों या निर्दलीय धुरंधर, सभी फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की मुद्रा में हैं। बावजूद इसके, अंदरखाने वार्डों का गणित बिछाया जा रहा है। किस वार्ड में कौन सा समीकरण बैठेगा और किस चेहरे पर जनता मुहर लगाएगी—इन सब पर मंथन का दौर जारी है।
प्रशासनिक तैयारी: अंतिम चरण में मतदाता सूची
जिला प्रशासन चुनाव को लेकर पूरी तरह मुस्तैद है। नगर परिषद क्षेत्र का पुनः निरीक्षण कार्य पूरा किया जा चुका है और मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रशासन ने पहले ही राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दे दिए हैं। चुनाव संचालन के लिए विभिन्न कोषांगों (Cells) का गठन भी कर लिया गया है।
पाकुड़ नगर परिषद: वार्डों का गणित
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पूरे नगर परिषद क्षेत्र को कुल 21 वार्डों में विभाजित किया गया है। इन वार्डों में मतदाताओं की संख्या में काफी असमानता देखी जा रही है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।
| मुख्य आंकड़े | विवरण |
| कुल वार्ड | 21 |
| सबसे छोटा वार्ड (मतदाताओं के आधार पर) | वार्ड संख्या 5 (1150 मतदाता) |
| सबसे बड़ा वार्ड (मतदाताओं के आधार पर) | वार्ड संख्या 14 (2115 मतदाता) |
| प्रमुख चुनावी क्षेत्र | बलिहारपुर, छोटी अलीगंज, बड़ी अलीगंज, धनुष पूजा क्षेत्र |
वार्डवार संभावित मतदाता संख्या पर एक नजर:
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार (संशोधन की संभावना के साथ):
- वार्ड 1 से 5: 1588, 1617, 1782, 2111, 1150
- वार्ड 6 से 10: 1662, 1423, 1803, 1901, 1769
- वार्ड 11 से 15: 1945, 1773, 1889, 2115, 1889
- वार्ड 16 से 21: 2114, 1539, 1751, 1683, 1376, 2076
जनता की निगाहें अब घोषणा पर
नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए होने वाले सीधे मुकाबले ने इस बार के चुनाव को और भी रोचक बना दिया है। बलिहारपुर से लेकर धनुष पूजा तक, मतदाता अब विकास के मुद्दों पर बात करने लगे हैं। अब बस इंतजार है तो आधिकारिक अधिसूचना का, जिसके बाद पाकुड़ की सियासत का असली चेहरा मैदान में नजर आएगा।
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