सुमन कुमार दत्ता -विशाल विचार(पाकुड़)

पाकुड़: झारखंड के पाकुड़ जिले में समेकित जनजातीय विकास अभिकरण (ITDA) के सरकारी खजाने में लगी 12.38 करोड़ रुपये की सेंधमारी ने राज्य सरकार और प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। घोटाले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी बागडोर सीआईडी (CID) ने संभाल ली है। सीआईडी मुख्यालय के निर्देश पर एक विशेष अनुसंधान टीम (SIT) का गठन किया गया है, जो इस महाघोटाले के नेटवर्क को जड़ से खंगालेगी।

फर्जी हस्ताक्षर और ‘एक चूक’ से खुला राज

इस करोड़ों के गबन का खुलासा किसी ऑडिट से नहीं, बल्कि बैंक मैनेजर की सतर्कता से हुआ। 8 दिसंबर को ITDA कार्यालय का अनुसेवक अक्षय रविदास बैंक में एक ‘एडवाइस’ लेकर पहुँचा था। जब एसबीआई (SBI) पाकुड़ शाखा के मुख्य प्रबंधक ने हस्ताक्षरों का मिलान किया, तो वे मेल नहीं खाए। शक होने पर जब पिछले रिकॉर्ड्स खंगाले गए, तो परत-दर-परत 12 करोड़ 38 लाख 66 हजार 600 रुपये की हेराफेरी सामने आ गई।

28 लोगों पर FIR: बैंक अधिकारियों पर भी लटकी तलवार

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार एक्का की शिकायत पर पाकुड़ नगर थाना में 28 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस घोटाले में केवल कार्यालय के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि बाहरी फर्में और बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है।

मुख्य आरोपी और फर्में:

  • कार्यालय कर्मी: अधीक्षक मानवेंद्र, कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार केवट, अक्षय रविदास।
  • अन्य आरोपी: मुकेश कुमार, मिठू कुमार झा, मिंटू कुमार मिश्रा, विप्लव शाहा।
  • संस्थान: शिव इंटरप्राइजेज सहित कई फर्जी लाभार्थी खाते।

जांच का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि बैंक के आला अधिकारियों ने बिना पुख्ता सत्यापन के इतनी बड़ी राशि बार-बार कैसे रिलीज की? क्या यह महज लापरवाही थी या सुनियोजित मिलीभगत?


SIT की जांच के 3 ‘टारगेट पॉइंट्स’

सीआईडी की विशेष टीम अब इन मुख्य बिंदुओं पर अपनी जांच केंद्रित करेगी:

  1. मास्टरमाइंड की पहचान: फर्जी हस्ताक्षर और सरकारी फाइलों में हेराफेरी का असली सूत्रधार कौन है?
  2. मनी ट्रेल (Money Trail): अवैध रूप से निकाली गई राशि किन-किन खातों में ट्रांसफर हुई और अंततः पैसा कहाँ गया?
  3. बैंक प्रोटोकॉल का उल्लंघन: सरकारी खाते से निकासी के निर्धारित नियमों को बैंक स्तर पर क्यों नजरअंदाज किया गया?

जनजातीय विकास के हक पर डाका

ITDA का फंड विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों के उत्थान, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए होता है। इतनी बड़ी राशि का गबन सीधे तौर पर गरीब आदिवासियों के हक पर प्रहार है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि सीआईडी की एंट्री के बाद अब कई ‘सफेदपोशों’ और रसूखदारों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

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