सुमन कुमार दत्ता -विशाल विचार(पाकुड़)
पाकुड़: जिला समालय सभागार में उपायुक्त (DC) मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला कारा सुरक्षा समिति की एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में जेल की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने और कैदियों के मानवाधिकारों व सुविधाओं को सुनिश्चित करने पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक (SP) सहित जेल प्रशासन और विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे।

सुरक्षा में चूक पर होगी सख्त कार्रवाई
बैठक के दौरान उपायुक्त मनीष कुमार ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि जेल परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की अवैध या प्रतिबंधित वस्तुओं का प्रवेश हर हाल में रोका जाए। इसके लिए उन्होंने सुरक्षा मानकों को और कड़ा करने की बात कही।
- सघन तलाशी अभियान: सभी प्रवेश द्वारों, बैरकों और सुरक्षा पोस्टों पर नियमित अंतराल पर कड़ी तलाशी लेने का निर्देश।
- सीसीटीवी और रात्रि गश्ती: जेल में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता और रात्रि चौकसी को दुरुस्त करने को कहा गया।
- हाई-रिस्क बंदी: संवेदनशील और उच्च जोखिम वाले बंदियों पर 24 घंटे विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।

महिला बंदियों और बच्चों के लिए विशेष सुविधाएं
प्रशासन का ध्यान केवल सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि जेल में रह रहे महिला बंदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों के कल्याण पर भी रहा। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि:
- पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य: बच्चों और महिलाओं को समय पर पौष्टिक भोजन और उचित मेडिकल चेकअप मिलना चाहिए।
- बुनियादी ढांचा: स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित शौचालय, विश्राम कक्ष और बच्चों के लिए खेल क्षेत्र (Play Area) को और अधिक बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
चिकित्सा और मानवाधिकार
उपायुक्त ने काराधीक्षक को सख्त लहजे में कहा कि बीमार बंदियों के उपचार में किसी भी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच और मुलाकाती व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने अंत में कहा, “कारा प्रशासन को सुरक्षा निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन करना होगा, किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
प्रमुख बिंदु (Highlights):
- उपायुक्त मनीष कुमार ने की जिला कारा सुरक्षा समिति की अध्यक्षता।
- जेल में अवैध वस्तुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध के निर्देश।
- महिला बंदियों और बच्चों के लिए स्वास्थ्य व खेल सुविधाओं पर जोर।
- हाई-रिस्क बंदियों की सतत निगरानी और रात्रि गश्ती अनिवार्य।
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