सुमन कुमार दत्ता -विशाल विचार (पाकुड़)

पाकुड़। जिला प्रशासन और उपायुक्त मनीष कुमार के सख्त निर्देशों के बावजूद पाकुड़ में आधार केंद्र संचालकों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला शहर के बैंक ऑफ इंडिया (BOI) शाखा स्थित आधार केंद्र का है, जहां सरकारी दर से अधिक पैसों की मांग की जा रही है और विरोध करने पर उपायुक्त के नाम का ही गलत इस्तेमाल कर ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

शिव शीतला मंदिर निवासी अनोज चौरसिया अपने आधार कार्ड से मोबाइल नंबर लिंक कराने के लिए बैंक ऑफ इंडिया स्थित आधार केंद्र पहुंचे थे। जब उन्होंने शुल्क के बारे में पूछा, तो केंद्र संचालक ने उनसे 100 रुपये की मांग की।

श्री चौरसिया ने जब इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मोबाइल लिंक करने का सरकारी शुल्क मात्र 50 रुपये है (जो विभिन्न परिस्थितियों में टैक्स मिलाकर अधिकतम 75 रुपये तक हो सकता है), तो संचालक ने बड़ी ही बेबाकी और गैर-जिम्मेदाराना तरीके से जवाब दिया।

उपायुक्त के नाम पर गुमराह करने की कोशिश

हैरानी की बात यह है कि संचालक ने अपनी अवैध वसूली को जायज ठहराने के लिए जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी का नाम ढाल के रूप में इस्तेमाल किया। संचालक ने ग्राहक से कहा:

“पाकुड़ उपायुक्त का आदेश है कि 25 रुपये ज्यादा लेना है। पेपर और इंक का खर्च अलग से लगता है, इसलिए उपायुक्त ने ही इसकी अनुमति दी है।”

शिकायत करने की बात पर दिखाई हेकड़ी

जब पीड़ित अनोज चौरसिया ने नियमों का उल्लंघन होने और इस धांधली की शिकायत सीधे उपायुक्त से करने की बात कही, तो संचालक डरा नहीं, बल्कि और अधिक हेकड़ी दिखाने लगा। उसने चुनौती भरे लहजे में कहा— “आपको जहां जाकर शिकायत करनी है कर सकते हैं, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।”

सरकारी शुल्क की हकीकत (अक्टूबर 2025 से प्रभावी)

आधार केंद्रों पर पारदर्शिता के लिए UIDAI ने स्पष्ट रेट चार्ट जारी किया है, जिसके अनुसार:

  • आधार नामांकन (नया): निःशुल्क।
  • डेमोग्राफिक अपडेट (नाम, पता, मोबाइल, ईमेल): ₹75।
  • बायोमेट्रिक अपडेट: ₹125 (कुछ आयु वर्गों के लिए प्रथम बार निःशुल्क)।
  • दस्तावेज़ अपडेट (केंद्र पर): ₹75।

प्रशासनिक साख पर सवाल

यह घटना दर्शाती है कि आधार केंद्र संचालकों के मन में प्रशासन का कोई खौफ नहीं है। उपायुक्त मनीष कुमार ने पूर्व में कई बार स्पष्ट किया है कि आधार सेवाओं के लिए निर्धारित शुल्क से एक पैसा भी अधिक लेना दंडनीय अपराध है। ऐसे में उपायुक्त के नाम का झूठा सहारा लेकर जनता को लूटना न केवल अवैध है, बल्कि यह जिला प्रशासन की छवि को भी धूमिल करने की कोशिश है।

स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि ऐसे केंद्रों का लाइसेंस तत्काल रद्द किया जाए और फर्जी हवाला देने वाले संचालक पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी के नाम का दुरुपयोग न कर सके।

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