सुमन कुमार दत्ता /विशाल विचार
महेशपुर (पाकुड़ )-लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर महेशपुर प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। शनिवार को महेशपुर साप्ताहिक हाट में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या छठ पूजा की सामग्रियों की खरीदारी में जुटी रही। हाट में विशेष रूप से बांस से बने सूप, डाला और कोनिया की बिक्री जोरों पर रही।श्रद्धालुओं का कहना है कि छठ पूजा में सूप का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसी में पूजन सामग्री सजाई जाती है। यही कारण है कि सूप की बिक्री पूरे वर्ष की तुलना में छठ के दौरान सर्वाधिक होती है। हालांकि कुछ लोग पीतल के सूप भी खरीदते हैं, लेकिन अधिकतर श्रद्धालु बांस से बने पारंपरिक सूप को ही प्राथमिकता देते हैं।हाट में सूप और टोकरी के अलावा नारियल, फल और पूजन सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ देखी गई। इस बार सूप की कीमत 100 से 150 रुपये और टोकरी की कीमत 150 से 220 रुपये रही। पिछले वर्ष सूप की कीमत 80 से 100 रुपये के बीच थी, जिससे स्पष्ट है कि इस वर्ष मूल्य वृद्धि ने श्रद्धालुओं की जेब पर असर डाला है।स्थानीय कारीगर अजमेर मियां, किस्मत मियां, बबलू मोहली और राजेश मोहली ने बताया कि एक सूप या डाला तैयार करने में काफी मेहनत और समय लगता है। उन्होंने बताया, “बांस की कीमत अब 100 से 200 रुपये प्रति पीस तक पहुंच गई है, जिससे तैयार उत्पाद की लागत बढ़ गई है।”कारीगरों के अनुसार, बढ़ती कच्चे माल की कीमत और श्रम लागत के कारण इन पारंपरिक वस्तुओं के दाम साल-दर-साल बढ़ते जा रहे हैं। बावजूद इसके, लोगों में छठ पर्व को लेकर उत्साह बरकरार है, और बाजारों में श्रद्धा, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
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