मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय टीम ने शुरू किया जमीनी सर्वेक्षण।

श्रीकांत दास / विशाल विचार
साहिबगंज।झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय अध्यक्ष एवं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर पार्टी महासचिव विनोद पांडे द्वारा गठित चार सदस्यीय केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल असम राज्य पहुंच चुका है। प्रतिनिधिमंडल असम में निवास कर रहे आदिवासी समुदाय की वर्तमान सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का गहन अध्ययन कर रहा है तथा उनके संवैधानिक अधिकारों और हितों की रक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर मंथन कर रहा है।प्रतिनिधिमंडल असम के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय आदिवासी नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित कर रहा है। इस दौरान आदिवासी समाज से जुड़े जमीनी मुद्दों, उनकी चुनौतियों, समस्याओं और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही ऑल इंडिया आदिवासी स्टूडेंट यूनियन (AIASU) की असम राज्य इकाई के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के साथ भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि असम में रह रहे आदिवासी समुदाय को भूमि अधिकार, शिक्षा, रोजगार, पहचान, सांस्कृतिक संरक्षण एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें समझना और उनके समाधान के लिए ठोस रणनीति तैयार करना अत्यंत आवश्यक है।इस चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में झारखंड सरकार के मंत्री चमरा लिंडा, राजमहल लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय कुमार हांसदा, राजमहल के विधायक मो. ताजुद्दीन उर्फ एमटी राजा तथा गुमला के विधायक भूषण तिर्की शामिल हैं।प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य असम में आदिवासी समाज की वास्तविक स्थिति को जमीनी स्तर पर समझकर उसकी विस्तृत रिपोर्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपना है।झामुमो नेतृत्व का स्पष्ट मानना है कि देश के विभिन्न राज्यों में निवास कर रहे आदिवासी समाज की समस्याओं को समझे बिना उनके समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी है। इसी सोच के तहत यह पहल आदिवासी समाज की एकजुटता, आत्मसम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम मानी जा रही है।
