विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि किसी को भी काम करने को लेकर मिली आजादी को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए. उन्होंने ये बातें आपातकाल के 50 वर्ष पूरा होने के मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं. उन्होंने कहा कि उस दौर में भ्रष्टाचार और महंगाई दोनों चरम पर थीं. स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी थी कि छात्रों को उनके कैंपस से उठा-उठाकर जेलों में डाला दिया गया था. जो लोग उस दौर में गिरफ्तार किए गए थे उन्होंने उस दौर की सरकार के खिलाफ हिम्मत दिखाई थी. 

एस जयशंकर ने आगे कहा कि आपातकाल का मुद्दा किसी भी राजनीतिक मुद्दे से ऊपर की बात है. आपातकाल ने स्पष्ट रूप से लोगों के जीवन के अंदाज पर भी प्रभाव डाला था। ये वह समय था जब सीधे-सीधे संविधान का मजाक उड़ाया गया। देश में आपातकाल केवल एक परिवार के कारण लगाया गया था. लेकिन इसका प्रभाव सभी पर था.

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