पॉक्सो एवं किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया गया विशेष जोर।

श्रीकांत दास / विशाल विचार
साहिबगंज।बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों की रोकथाम, उनके अधिकारों के संरक्षण तथा पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने की दिशा में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम, 2012 एवं किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर शनिवार को साहिबगंज में एक दिवसीय जिला स्तरीय बहु-हितधारक परामर्श
Multi-Stakeholders Consultation का आयोजन किया गया।यह कार्यक्रम झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के तत्वावधान में तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार साहिबगंज अखिल कुमार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। परामर्श का आयोजन व्यवहार न्यायालय, साहिबगंज स्थित लोक अदालत कक्ष में किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय संजय कुमार उपाध्याय, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) शेखर कुमार, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सिंधु नाथ लामाये, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अभिषेक प्रसाद, स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष राकेश कुमार मिश्रा, पुलिस उपाधीक्षक विजय कुमार कुशवाहा एवं जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पूनम कुमारी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।परामर्श के दौरान वक्ताओं ने बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि पॉक्सो अधिनियम का मूल उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देना तथा उन्हें सुरक्षित, संवेदनशील और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को बाल-अनुकूल, मानवीय और संवेदनशील बनाया जाना आवश्यक है, ताकि पीड़ित बच्चों को न्याय प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार के मानसिक आघात से बचाया जा सके।बैठक में जिला प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय एवं आपसी तालमेल की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि सभी संबंधित विभागों के सामूहिक प्रयास से ही पीड़ित बच्चों को त्वरित न्याय, प्रभावी सहायता, परामर्श एवं पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सकता है।इसके साथ ही बाल-मित्र पुलिसिंग, जांच प्रक्रिया में तेजी, समयबद्ध मेडिकल जांच, साक्ष्य संकलन, तथा संवेदनशील और सुरक्षित पूछताछ प्रक्रिया के महत्व को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि बच्चों से जुड़े मामलों में लापरवाही या देरी गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती है, इसलिए हर स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।इस जिला स्तरीय बहु-हितधारक परामर्श में न्यायिक अधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, जिला बाल संरक्षण इकाई के सदस्य, अधिवक्ता, चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न संस्थाओं एवं संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों की पहचान करना तथा बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, न्याय एवं पुनर्वास के लिए एक सुदृढ़ और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना रहा।
