श्रीकांत दास / विशाल विचार

साहिबगंज, झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशन तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, साहिबगंज अखिल कुमार के मार्गदर्शन में शुक्रवार बाल दिवस के अवसर पर बाल गृह के बच्चों एवं नेत्रहीन विद्यालय के बालक-बालिकाओं के बीच विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में उपस्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत ने बच्चों के उत्साह और प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि “दिव्यांगता किसी भी व्यक्ति की क्षमता को कम नहीं करती। दृढ़ इच्छाशक्ति और परिश्रम से असंभव भी संभव हो सकता है।”उन्होंने विश्व प्रसिद्ध नेत्रहीन पियानोवादक स्टीवी वंडर तथा कृत्रिम पैरों के सहारे माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली अरुणिमा सिन्हा के उदाहरण देकर बच्चों को जीवन में संघर्ष और सफलता के महत्व से अवगत कराया। विश्वनाथ भगत ने बच्चों को कानूनी अधिकार,निःशुल्क विधिक सहायता,न्याय तक पहुंच,पॉक्सो अधिनियम,आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी।साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों—शिक्षा का अधिकार, समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार—तथा मौलिक कर्तव्यों—संविधान का पालन, राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान, देश की रक्षा—के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि लीगल एड डिफेन्स काउंसिल (LADC), पारा विधिक स्वयंसेवक (PLV) और न्याय मित्र द्वारा विद्यालयों में नियमित रूप से विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी क्रम में चित्रकला, गायन आदि रचनात्मक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।अंत में बच्चों को NALSA हेल्पलाइन 15100 तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में जानकारी देते हुए विश्वनाथ भगत ने कहा कि किसी भी संकट की स्थिति में ये नंबर बच्चों की सुरक्षा और त्वरित सहायता के महत्वपूर्ण साधन हैं।कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी सुश्री पूनम कुमारी, अन्य अधिकारी-कर्मचारी तथा पारा विधिक स्वयंसेवक-न्याय मित्र भी उपस्थित रहे।शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों में विधिक जागरूकता बढ़ाना, आत्मविश्वास विकसित करना एवं उन्हें सामाजिक-कानूनी सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना था।

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