जरूरतमंद परिवारों के बीच कंबल वितरण, योजनाओं की जमीनी हकीकत का लिया गया प्रत्यक्ष जायजा।

श्रीकांत दास / विशाल विचार
साहिबगंज।आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में जिला प्रशासन लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा ने बोरियो एवं तालझारी प्रखंड के पहाड़िया बहुल क्षेत्रों का विस्तृत एवं व्यापक दौरा किया। इस अवसर पर उनके साथ जिला पंचायती राज पदाधिकारी (डीपीआरओ) अनिल कुमार सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।दौरे के क्रम में उप विकास आयुक्त द्वारा बोरियो प्रखंड अंतर्गत केलाबाड़ी पहाड़, परतेमार्को पहाड़, मीरा पहाड़, नवगछी पहाड़, लौंहडा मार्को पहाड़, दुर्गा टोला आदरो मार्को, आदरो बेरो पहाड़ एवं बड़ा तौफीर पंचायत, जबकि तालझारी प्रखंड अंतर्गत सरसा पहाड़ एवं करणपुरा पंचायत सहित कुल 8 पहाड़िया गांवों का भ्रमण किया गया।भ्रमण के दौरान उप विकास आयुक्त ने पहाड़िया समुदाय के महिला एवं पुरुषों से सीधे संवाद स्थापित कर गांवों में उपलब्ध पेयजल, शौचालय, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क संपर्क, साथ ही प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, मनरेगा सहित अन्य महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति की गहन समीक्षा की।लौंहडा मार्को पहाड़िया गांव में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं का स्थल निरीक्षण करते हुए उप विकास आयुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को सभी योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने का सख्त निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।इस अवसर पर उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा ने कहा “प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सरकार की योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन कर कमियों को दूर करना है, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय तक सुनिश्चित रूप से पहुंच सके।”दौरे के दौरान उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा एवं डीपीआरओ अनिल कुमार द्वारा सभी 8 पहाड़िया गांवों के जरूरतमंद परिवारों के बीच कंबल का वितरण भी किया गया। कंबल पाकर ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली, जिससे उन्हें ठंड के मौसम में राहत मिल सके।इस अवसर पर सामाजिक सुरक्षा विभाग के लिपिक अंजनी हांसदा, अभिषेक कुमार, अनुसेवक मनोज कुमार, संबंधित गांवों के प्रधान, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में पहाड़िया जनजाति के लोग उपस्थित रहे।
