बाल विवाह समाज का घोर अभिशाप, शिक्षा व आत्मनिर्भरता से ही होगा इसका उन्मूलन : डॉ. रणजीत कुमार सिंह।

श्रीकांत दास / विशाल विचार

राजमहल (साहिबगंज)।भारत सरकार एवं सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के दिशा-निर्देश पर राजमहल मॉडल कॉलेज में बुधवार को “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान के अंतर्गत एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के प्रति जन-जागरूकता फैलाना तथा युवा पीढ़ी को इसके सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्यगत और कानूनी दुष्परिणामों से अवगत कराना था।कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने की, जबकि संचालन डॉ. रमजान अली द्वारा किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. रमजान अली ने कहा कि बाल विवाह न केवल बालिकाओं के शारीरिक विकास को बाधित करता है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और भविष्य की संभावनाओं पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के कारण बालिकाएँ शिक्षा से वंचित रह जाती हैं, जो किसी भी समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।डॉ. अली ने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे स्वयं जागरूक बनें तथा अपने परिवार, मोहल्ले और समाज में बाल विवाह के विरुद्ध आवाज़ बुलंद करें, ताकि इस कुरीति को जड़ से समाप्त किया जा सके।अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने बाल विवाह को समाज का घोर अभिशाप बताते हुए कहा कि “आज जब देश डिजिटल और आधुनिक युग में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, तब भी बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों का बना रहना अत्यंत चिंताजनक है।”उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति का आकलन महिलाओं और बालिकाओं की स्थिति से किया जाता है। बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर, आत्मनिर्भरता और स्वयं निर्णय लेने की क्षमता प्रदान कर ही बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है।डॉ. सिंह ने बाल विवाह निषेध अधिनियम के अंतर्गत कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि बाल विवाह कानूनन दंडनीय अपराध है तथा इसके उन्मूलन के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की छात्राएँ इशिता दत्ता, मशर्रत जहाँ एवं सिमरन परवीन ने प्रभावशाली कविता पाठ प्रस्तुत किया। उनकी कविताओं में बाल विवाह का दर्द, बालिकाओं के टूटते सपने और शिक्षा के महत्व को अत्यंत संवेदनशील एवं भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत किया गया, जिससे उपस्थित छात्र छात्राओं और शिक्षकों में गहरी संवेदना एवं जागरूकता देखने को मिली।इस अवसर पर डॉ. अमित कुमार, सौरभ साहा, नरेश मंडल, सुमन सिंह, ऋतु कुमारी, सुमित साहा, प्रकाश महतो, बबलू हेम्ब्रम सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक शिक्षिकाएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया तथा बाल विवाह के विरुद्ध समाज में जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लिया।कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बाल विवाह के खिलाफ आवाज़ उठाएँ, कानूनी जानकारी को जन-जन तक पहुँचाएँ और “बाल विवाह मुक्त भारत” के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

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