लखनऊ। यूपी की सियासत में एक दिलचस्प मुलाकात ने हलचल मचा दी है। मुख्तार अंसारी के बेटे और मऊ से विधायक अब्बास अंसारी ने गुरुवार को लखनऊ के मेदांता अस्पताल में इलाज करा रहे योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर से मुलाकात की। अब्बास ने अस्पताल पहुंचकर राजभर की सेहत का हालचाल लिया। इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है कि क्या पूर्वांचल की राजनीति में कोई नया समीकरण बनने की तैयारी है।

राजभर का चल रहा है इलाज

बीते दिनों ओम प्रकाश राजभर की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत पहले से बेहतर है। इलाज के दौरान कई नेता और समर्थक उनसे मुलाकात कर चुके हैं। इसी कड़ी में अब्बास अंसारी का पहुंचना राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है।

अंसारी परिवार और राजभर का पुराना रिश्ता

पूर्वांचल की राजनीति में अंसारी परिवार और ओम प्रकाश राजभर दोनों का ही बड़ा प्रभाव रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में अब्बास अंसारी ने मऊ सीट से राजभर की पार्टी SBSP के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। बाद में हालांकि राजभर ने बीजेपी से हाथ मिला लिया और योगी सरकार में मंत्री बन गए।
मुख्तार अंसारी की जेल में मौत के बाद यह कयास लगाए जाने लगे थे कि अंसारी परिवार और राजभर के बीच दरार आ चुकी है। लेकिन हाल के दिनों में राजभर और अंसारी परिवार के नेताओं के बयानों से साफ झलकता है कि उनके पारिवारिक संबंध अभी भी बरकरार हैं। अफजाल अंसारी ने भी हाल ही में कहा था कि राजभर से उनके रिश्ते निजी स्तर पर मजबूत हैं। अब अब्बास की मुलाकात ने इन अटकलों को और बल दे दिया है।

सीएम योगी भी पहुंचे थे अस्पताल

इससे पहले बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी ओम प्रकाश राजभर का हाल जानने अस्पताल पहुंचे थे। सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर खुद इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा,
“लखनऊ स्थित मेदांता हॉस्पिटल में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार में मेरे सहयोगी, कैबिनेट मंत्री श्री ओम प्रकाश राजभर जी से आज भेंट कर उनका कुशल-क्षेम जाना। प्रभु श्री राम से उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना है।”

सियासी मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब्बास अंसारी की यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है। यह संदेश भी है कि पूर्वांचल की राजनीति में अंसारी परिवार और राजभर का समीकरण अभी भी जीवित है। ऐसे में आने वाले चुनावों से पहले यह रिश्ता विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए अहम भूमिका निभा सकता है।

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