
श्रीकांत दास / विशाल विचार
बरहरवा (साहिबगंज) रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) बरहरवा की सतर्कता से सोमवार की देर शाम मानव तस्करी की एक संभावित घटना टल गई। आरपीएफ इंस्पेक्टर बरहरवा संजीव कुमार के नेतृत्व में सोमवार रात 20:30 बजे से बरहरवा रेलवे स्टेशन परिसर में मानव तस्करी एवं अन्य असामाजिक गतिविधियों के विरुद्ध सघन जांच अभियान चलाया जा रहा था।इस दौरान इंस्पेक्टर संजीव कुमार के साथ सहायक उप निरीक्षक विनय कुमार टुडू, कांस्टेबल अमरेश कुमार एवं कांस्टेबल अनिल कुमार साह मौजूद थे। जांच के क्रम में जब आरपीएफ टीम स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में पहुंची, तो बुकिंग ऑफिस के पास तीन नाबालिग लड़के संदिग्ध अवस्था में खड़े दिखाई दिए।संदेह होने पर आरपीएफ कर्मियों ने जब उनसे पूछताछ की, तो तीनों घबरा गए और स्पष्ट जवाब देने से बचने लगे। कड़ाई से पूछने पर उन्होंने अपना नाम अनवर मोमिन (उम्र 16 वर्ष), राजेश किस्कू (उम्र 15 वर्ष) और सोहिल मिया (उम्र 16 वर्ष) बताया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि एक नाबालिग थाना लिट्टीपाड़ा, जबकि दो थाना पाकुड़, जिला पाकुड़ के रहने वाले हैं। तीनों ने बताया कि वे आसपास के गांवों के निवासी हैं और एक-दूसरे को पहले से जानते हैं।आगे की पूछताछ में नाबालिगों ने खुलासा किया कि वे अपने माता-पिता को बिना बताए गांव के कुछ लड़कों के साथ बिहार के फतुहा स्थित एक बिस्किट कंपनी में काम करने जा रहे थे। उनकी गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने पर आरपीएफ ने तीनों नाबालिगों को सुरक्षा की दृष्टि से आरपीएफ पोस्ट बरहरवा लाया।मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल संरक्षण मंथन, राजमहल (साहिबगंज) को तुरंत सूचना दी गई। साथ ही तीनों नाबालिगों के परिजनों को मोबाइल फोन के माध्यम से घटना की जानकारी दी गई। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण करने के उपरांत, तीनों नाबालिग लड़कों को बाल संरक्षण मंथन, राजमहल साहिबगंज की प्रतिनिधि अंशु मालाकार को सुरक्षित रूप से सौंप दिया गया।आरपीएफ की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से न केवल तीन नाबालिगों की जान और भविष्य सुरक्षित हुआ, बल्कि मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध पर भी एक बार फिर प्रभावी रोक लगाई जा सकी।
