पर्यावरण संरक्षण का दिया गया संदेश, नववर्ष को हरित बनाने का लिया संकल्प।

श्रीकांत दास / विशाल विचार
राजमहल साहिबगंज।राजमहल मॉडल कॉलेज परिसर में वर्ष 2025 के अंतिम दिन पर्यावरण संरक्षण को समर्पित एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान तथा राजमहल मॉडल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में जिला संयोजक प्रवीर कुमार सिंह के सौजन्य से संपन्न हुआ।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन जागरूकता फैलाना तथा नववर्ष 2026 को हरित, स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने का संकल्प लेना था। इस अवसर पर बीते वर्ष की उपलब्धियों और सकारात्मक अनुभवों को स्मरण करते हुए सभी ने आने वाले वर्ष में प्रकृति के प्रति अधिक संवेदनशील एवं जिम्मेदार बनने का संकल्प लिया।कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह, मुख्य अतिथि जिला परिषद सदस्य रणधीर सिंह एवं ब्रजनंदन मंडल ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर कॉलेज परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए। अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस का कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का सामाजिक और नैतिक दायित्व है।प्राचार्य डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि वृक्षारोपण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।”उन्होंने वर्ष 2026 के लिए ‘पेड़ लगाएं, जल बचाएं और प्लास्टिक का उपयोग कम करें’ का सामूहिक संकल्प दिलाते हुए छात्रों से अपील की कि वे पौधों की नियमित देखभाल करें और पर्यावरण संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।कार्यक्रम में कॉलेज के दर्जनों छात्र-छात्राओं एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उपस्थित प्रमुख लोगों में मोहन कुमार, सुमित कुमार साह, करमु महतो, प्रकाश महतो, जयकर सिंह सहित छात्र-छात्राओं में साहिबा, असमा, नसरीन, सूफियाना, रामकुमार साहा, चंदन, प्रीति कुमारी, सुप्रिया, मोहिद अहमद आदि शामिल रहे।वहीं अतिथियों में ब्रजनंदन मंडल सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पौधों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने का सामूहिक संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल साबित हुआ, बल्कि विद्यार्थियों के मन में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को भी सुदृढ़ कर गया।
