
श्रीकांत दास / विशाल विचार
साहिबगंज। गंगा नदी की जल गुणवत्ता और प्रदूषण स्तर का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के उद्देश्य से अतुल्य भारत – अतुल्य गंगा की दो सदस्यीय विशेषज्ञ टीम शुक्रवार को साहिबगंज पहुँची। झारखंड प्रभारी एवं प्रख्यात भूवैज्ञानिक डॉ. रणजीत कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम ने जिले के कई प्रमुख घाटों और नदी तटों से जल नमूने एकत्र किए।टीम ने साहिबगंज मुख्य घाट, मसकलैया, मोकिमपुर, शोभापुर और राजमहल क्षेत्र में गंगा जल का विस्तृत सर्वेक्षण किया। इससे पूर्व वे पटना, मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव से सैम्पल लेकर साहिबगंज पहुँचे थे। यह अभियान गंगा और यमुना नदियों में प्रदूषण की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक अध्ययन करने के लिए चलाया जा रहा है।अतुल्य गंगा टीम में दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) के पीएचडी शोधार्थी अविनाश कुमार एवं आनंद सेबेस्टियन शामिल हैं। टीम शनिवार को राजमहल से आगे बढ़ते हुए पश्चिम बंगाल के मालदा की ओर रवाना होगी।गंगा जल में ऑक्सीजन, pH, EC और TDS का किया गया परीक्षण डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने बताया कि टीम द्वारा डीओ मीटर के माध्यम से कुल 17 पैरामीटर पर परीक्षण किया गया, जिनमें मुख्य रूप से डिज़ॉल्व्ड ऑक्सीजन (DO), pH, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (EC) और टोटल डिज़ॉल्व्ड सॉलिड्स (TDS) शामिल हैं। विभिन्न स्थानों पर प्राप्त प्रमुख परिणाम इस प्रकार रहे साहिबगंज मुख्य घाट DO: 6.78 mg/L pH: 8.10 EC: 502 TDS: 251 मोकिमपुर DO: 5.97 mg/L pH: 9.01 EC: 377 TDS: 189 शोभापुर घाट DO: 7.63 mg/L pH: 8.49 EC: 360 TDS: 180 राजमहल DO: 5.83 mg/L pH: 8.41 EC: 357 TDS: 179 डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने बताया कि यह वैज्ञानिक अभियान “सबका साथ, हो गंगा साफ” की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। जल नमूना संग्रहण का कार्य मेजर जनरल वी.के. भुट्ट एवं प्रो. कर्नल के.सी. तिवारी के मार्गदर्शन में निरंतर जारी है। अंतिम चरण में टीम गंगासागर तक पहुँचकर संपूर्ण जल गुणवत्ता अध्ययन को पूरा करेगी।उद्देश्य उपग्रह आधारित जल गुणवत्ता निगरानी प्रणाली का विकास इस अनुसंधान कार्य का प्रमुख उद्देश्य गंगा–यमुना नदियों की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक और समग्र मूल्यांकन करना है। एकत्रित आंकड़ों के आधार पर भविष्य में एक उपग्रह-आधारित जल गुणवत्ता निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे नदी संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जल प्रबंधन को और अधिक प्रभावी, तेज और वैज्ञानिक बनाया जा सकेगा।टीम का यह प्रयास गंगा नदी को निर्मल और अविरल बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
