दिल्ली दंगों के मामले में साजिशन शामिल होने के आरोपी उमर खालिद को लेकर शीर्ष न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत दिल्ली पुलिस से इस संबंध में जबाव चाहता है। इसलिए उसने नोटिस भेजकर 6 हफ्ते का समय दिया है तथा उचित जबाव की माँग की है। खालिद के आरोपों की गम्भीरता का अंदाजा लगाते हुए हाईकोर्ट ने भी जमानत देने से इंकार कर दिया था। उमर खालिद जेएनयू का पूर्व छात्र है और उसके साथ कई लोगों पर गैर कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम और दंड संहिता के नियमों के अनुसार फरवरी 2020 के दंगों के संबंध में आरोप लगाये गये हैं। उमर खालिद को इन दंगों का “मास्टरमाइंड” बताया गया है। इन दंगों से पहले दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम तथा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के संबंध में विरोध प्रदर्शन चल रहा था जिसमें कि 53 लोग मारे गए थे , 700 से अधिक लोग इसमें घायल हुए थे। स्थिति कुछ इस कद्र हावी हो गई थी कि पुलिस बल द्वारा लोगों को नियंत्रित कर पाना कठिन था।

24 फरवरी 2020 को इस मुद्दे के समर्थक व विरोधी आपस में भिड़ गए थे और देखते ही देखते हिंसा ने जोर पकड़ लिया था। हिंसा ने बाद में साम्प्रदायिक रूप ले लिया था। उमर खालिद की तरफ से कोर्ट में उसकी तरफ से जबाव देने के लिए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल मौजूद थे। सिब्बल ने खालिद की तरफ से जबाव देते हुए कई तारीखों का जिक्र किया तथा कहा कि दंगों के समय वह वहाँ मौजूद नहीं थे। पीठ ने मामले को सुनने के बाद नोटिस जारी करने के लिए कहा तथा मामले को अवकाश पीठ के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

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