पोर्टल पर ससमय एवं गुणवत्तापूर्ण डाटा प्रविष्टि सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश।

श्रीकांत दास / विशाल विचार

साहिबगंज।उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा की अध्यक्षता में पंचायती राज विभाग अंतर्गत संचालित महत्वपूर्ण योजनाओं की वर्तमान प्रगति की समीक्षा को लेकर एक विस्तृत समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में ज्ञान केंद्र, पंचायत एवं पंचायत भवन सुदृढ़ीकरण, ‘मेरा गाँव मेरी धरोहर’ योजना तथा मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन योजना सहित अन्य योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई।बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त ने योजनाओं के प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि योजनाओं की वास्तविक प्रगति का सही आकलन तभी संभव है, जब पोर्टल पर डाटा प्रविष्टि ससमय और गुणवत्तापूर्ण हो।इस क्रम में सभी पंचायत सचिवों, प्रखंड समन्वयकों एवं बी०एल०ई० को निर्देशित किया गया कि वे डाटा एंट्री कार्य को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर पोर्टल पर प्रविष्टि सुनिश्चित करें। उप विकास आयुक्त ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं जमीनी हकीकत की समीक्षा हेतु अनुश्रवण एवं निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए गए। इसके तहत सभी प्रखंड समन्वयकों एवं प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों (BPRO) को साप्ताहिक अनिवार्य क्षेत्र भ्रमण करने का निर्देश दिया गया।साथ ही, क्षेत्र भ्रमण के उपरांत प्रत्येक सप्ताह निरीक्षण प्रतिवेदन जिला कार्यालय को उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया, ताकि योजनाओं में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।बैठक के दौरान ‘मेरा गाँव मेरी धरोहर’ योजना के अंतर्गत कोमल सिंह द्वारा ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में योजना के उद्देश्य, कार्यप्रणाली तथा पोर्टल पर डाटा प्रविष्टि की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।वहीं, प्रभारी डीपीएम अभिजीत कुमार ने मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन योजना के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी साझा करते हुए डाटा की ससमय प्रविष्टि के महत्व पर विशेष बल दिया।बैठक के अंत में उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं का लाभ निर्धारित समय-सीमा के भीतर जमीनी स्तर तक पहुँचे, इसके लिए आपसी समन्वय, सतत निगरानी एवं नियमित समीक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।उन्होंने कहा कि पंचायती राज योजनाएं ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं, अतः इनके सफल क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।

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