देश में मौसम लगातार गर्माहट पकड़ रहा है। तापमान तेजी के साथ बढ़ रहा है और इसी बजह से मानो आसमान से आग बरस रही है। गर्मी अभी से इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोग हीटस्ट्रोक के शिकार हो रहे हैं। गर्मी में बढ़ोत्तरी और हीटवेव के सम्बन्ध में हाल ही में एक अध्ययन हुआ। अध्ययन के मुताबिक भारत में हीटवेव जलवायु परिवर्तन के गम्भीर परिणामों में से एक है। देश के 90% हिस्से को इसकी चपेट में बताया गया है। राजधानी दिल्ली में गर्म हवाओं के चलने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अध्ययन कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में किया गया। वहाँ रामित देबनाथ और उनके सहयोगियों ने बताया कि दिल्ली का क्षेत्र हीटवेव और जलवायु परिवर्तन के लिए बेहद संवेदनशील है। अध्ययन में सतत् विकास लक्ष्यों की भी बात की गई है। सतत् विकास लक्ष्यों के बारे में कहा गया है कि भारत इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए जिन संयुक्त राष्ट्र के मानकों के हिसाब से तेजी से बढ़ रहा है , इस प्रक्रिया में जलवायु परिवर्तन से धीमापन आ सकता है। सभी देशों ने विभिन्न जलवायु परिवर्तन सम्मेलनों के आधार पर अपने-अपने राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किए हैं। मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस के पूर्व सचिव एम राजीवन ने बताया कि आँकड़ों के अनुसार भारत में पिछले करीब 50 सालों से करीब 17 हजार लोगों की मृत्यु हीटवेव के कारण हुई है। नवी मुंबई के एक मामले में हाल ही में महाराष्ट्र सरकार का कोई पुरस्कार समारोह हो रहा था , वहाँ करीब तेरह लोगों की मौत हीटवेव के कारण हो गई। स्टडी के मुताबिक भारत का 90% हिस्सा हीटवेव प्रभावों के हिसाब से बेहद खतरे की श्रेणी में है। साथ ही यह भी बताया गया है कि इससे भारत के सतत् विकास लक्ष्य तो देरी के साथ प्रभावित होंगे ही , साथ ही सामान्य जनमानस इससे सीधे-सीधे गम्भीर रूप से प्रभावित होगा। हीटवेव लोगों को मुसीबत में डाल सकती हैं। इससे बिजली , पानी आदि की बुनियादी जरूरतें भी प्रभावित होंगी।

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